लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज कहा कि मेवाड़ की पवित्र धरती ने पूरी दुनिया को साहस, वीरता और स्वाभिमान का संदेश दिया है। उदयपुर में महाराणा प्रताप की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए श्री बिरला ने कहा कि इस महान योद्धा का जीवन देशभक्ति, त्याग और आज़ादी की लड़ाई का एक अनोखा उदाहरण है, जो आज की और आने वाली पीढ़ियों को हमेशा रास्ता दिखाता रहेगा।

श्री बिरला ने कहा कि महाराणा प्रताप ने जानबूझकर राज-पाट के ऐशो-आराम को छोड़ दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन अपनी जनता की सेवा, मेवाड़ की आज़ादी और लोगों के सम्मान की रक्षा में लगा दिया। उन्होंने आगे कहा कि इतिहास में मेवाड़ का संघर्ष अनोखा है। बहुत कम साधन होने के बाद भी महाराणा प्रताप ने स्थानीय भील समुदाय और आम लोगों के साथ मिलकर देश की पहचान और सम्मान को बचाने के लिए बड़े हौसले और भरोसे के साथ लड़ाई लड़ी।

इस क्षेत्र के इतिहास की बात करते हुए श्री बिरला ने कहा कि महाराणा प्रताप, महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा और राणा पुंजा जैसी महान हस्तियाँ देश सेवा के लिए हमेशा प्रेरणा देती रहेंगी। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति और अन्याय के खिलाफ लड़ाई का एक जीता-जागता प्रतीक बन चुका है।

इतिहास की इस सीख को आज के लक्ष्यों से जोड़ते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने युवाओं से अपील की कि वे ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए इसी मेहनत और समर्पण के साथ काम करें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है, देश के लिए समर्पण, अनुशासन और ज़िम्मेदारी की भावना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

श्री बिरला ने कहा कि एक सच्चा विकसित भारत वह होगा, जहाँ संस्कृति की पुरानी पहचान भी होगी और आज के ज़माने की नई तकनीक भी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कि मेवाड़ का यह प्रेरक इतिहास आने वाली पीढ़ियों को देश की सेवा और स्वाभिमान के रास्ते पर चलने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

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