डॉ. अमीबेन उपाध्याय के हाथों विमोचन, प्रेरणादायक कथा

गुजरात सरकार की क्लास-1 अधिकारी और नवोदित लेखिका पिनल सोजित्रा की पहली उपन्यास ‘परमसिद्धा’ का विमोचन अहमदाबाद में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. अमीबेन उपाध्याय के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर अनेक साहित्य प्रेमी और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

विमोचन समारोह नवजीवन ट्रस्ट के जीतेंद्र देसाई मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। डॉ. अमीबेन उपाध्याय ने उपन्यास की सराहना करते हुए कहा, ‘‘यह उपन्यास समाज में व्याप्त पुत्र-प्रधानता की मानसिकता के बीच एक बेटी के संघर्ष और उसकी सफलता की प्रेरणादायक गाथा प्रस्तुत करता है।’’

इस मौके पर प्रसिद्ध कवयित्री और समीक्षक उषाबेन उपाध्याय ने ‘परमसिद्धा’ में लेखिका द्वारा किए गए भाषा-कर्म पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कृति की भाषा की विशेषताओं और लेखन शैली का विश्लेषण किया। गुजराती साहित्य अकादमी के महामंत्री डॉ. जयेंद्रसिंह जादव ने कहा कि पिनल सोजित्रा ने किस तरह एक क्षण को दूसरे क्षण से जोड़कर उत्कृष्ट उपन्यास का सृजन किया है, वह उल्लेखनीय है।

एनआईएमसीजे के डायरेक्टर डॉ. शिरीष काशिकर और गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीपसिंह राठौड़ ने विश्व साहित्य के विभिन्न संदर्भों के साथ ‘परमसिद्धा’ का अनुबंध प्रस्तुत किया। उन्होंने इस कृति का पठन क्यों अनिवार्य है, इस पर रोचक विचार साझा किए।

लेखिका पिनल सोजित्रा ने अपने प्रतिक्रिया में कहा, ‘‘‘परमसिद्धा’ एक सामान्य बालिका के असाधारण महिला बनने की जीवन यात्रा है; जो अस्वीकार से स्वीकार, परनिर्भरता से आत्मनिर्भरता और भग्नावस्था से पुनर्निर्माण तक की कथा को रेखांकित करती है।’’

पिनल सोजित्रा ने आगे कहा कि कृति की नायिका रिशिता इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक की ‘जेन-ज़ेड’ पीढ़ी का सटीक प्रतिनिधित्व करती है।

इस विमोचन अवसर पर विभिन्न साहित्य प्रेमियों ने उपन्यास के विषय, भाषा और समकालीनता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

ऐसी कृतियों के माध्यम से समाज में व्याप्त मानसिकताओं के खिलाफ नई दृष्टि और प्रेरणा मिलती है, ऐसा सहभागी अतिथियों का मत रहा।

विमोचन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

डॉ. अमीबेन उपाध्याय के हाथों विमोचन, प्रेरणादायक कथा

गुजरात सरकार की क्लास-1 अधिकारी और नवोदित लेखिका पिनल सोजित्रा की पहली उपन्यास ‘परमसिद्धा’ का विमोचन अहमदाबाद में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. अमीबेन उपाध्याय के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर अनेक साहित्य प्रेमी और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

विमोचन समारोह नवजीवन ट्रस्ट के जीतेंद्र देसाई मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। डॉ. अमीबेन उपाध्याय ने उपन्यास की सराहना करते हुए कहा, ‘‘यह उपन्यास समाज में व्याप्त पुत्र-प्रधानता की मानसिकता के बीच एक बेटी के संघर्ष और उसकी सफलता की प्रेरणादायक गाथा प्रस्तुत करता है।’’

इस मौके पर प्रसिद्ध कवयित्री और समीक्षक उषाबेन उपाध्याय ने ‘परमसिद्धा’ में लेखिका द्वारा किए गए भाषा-कर्म पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कृति की भाषा की विशेषताओं और लेखन शैली का विश्लेषण किया। गुजराती साहित्य अकादमी के महामंत्री डॉ. जयेंद्रसिंह जादव ने कहा कि पिनल सोजित्रा ने किस तरह एक क्षण को दूसरे क्षण से जोड़कर उत्कृष्ट उपन्यास का सृजन किया है, वह उल्लेखनीय है।

एनआईएमसीजे के डायरेक्टर डॉ. शिरीष काशिकर और गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीपसिंह राठौड़ ने विश्व साहित्य के विभिन्न संदर्भों के साथ ‘परमसिद्धा’ का अनुबंध प्रस्तुत किया। उन्होंने इस कृति का पठन क्यों अनिवार्य है, इस पर रोचक विचार साझा किए।

लेखिका पिनल सोजित्रा ने अपने प्रतिक्रिया में कहा, ‘‘‘परमसिद्धा’ एक सामान्य बालिका के असाधारण महिला बनने की जीवन यात्रा है; जो अस्वीकार से स्वीकार, परनिर्भरता से आत्मनिर्भरता और भग्नावस्था से पुनर्निर्माण तक की कथा को रेखांकित करती है।’’

पिनल सोजित्रा ने आगे कहा कि कृति की नायिका रिशिता इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक की ‘जेन-ज़ेड’ पीढ़ी का सटीक प्रतिनिधित्व करती है।

इस विमोचन अवसर पर विभिन्न साहित्य प्रेमियों ने उपन्यास के विषय, भाषा और समकालीनता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

ऐसी कृतियों के माध्यम से समाज में व्याप्त मानसिकताओं के खिलाफ नई दृष्टि और प्रेरणा मिलती है, ऐसा सहभागी अतिथियों का मत रहा।

विमोचन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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