राजधानी में हीट वेव के प्रकोप के चलते आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली सरकार ने खतरे को देखते हुए हीट वेव एक्शन प्लान 2026 लागू किया है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है और स्वास्थ्य विभाग ने बचाव के लिए कई कदम उठाए हैं।
राजधानी के 400 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयाँ और मेडिकल सामग्री उपलब्ध कराई गई है। 30 अस्पतालों में ‘कूल रूम’ बनाए गए हैं, जिससे हीट स्ट्रोक के मरीजों को त्वरित राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त, 330 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं और मेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
सरकार ने शहरभर में 2000 वॉटर कूलर, 11,000 से अधिक कूलिंग पॉइंट्स और कई वाटर एटीएम स्थापित किए हैं। स्कूलों में ‘वॉटर बेल सिस्टम’ लागू किया गया है, ताकि बच्चों को समय-समय पर पानी पीने की याद दिलाई जा सके। निर्माण कार्यों पर दोपहर 12 से 3 बजे तक रोक लगा दी गई है। बिजली आपूर्ति निर्बाध रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आमजन को अतिरिक्त गर्मी में राहत मिल सके।
अस्पतालों में तैयारियों के साथ डॉक्टरों ने जनता को लू से बचाव के उपाय भी बताए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी से बचने के लिए हल्के और ढीले कपड़े पहनें, दिन में बार-बार पानी पीते रहें और दोपहर में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
शहर के विभिन्न इलाकों में पशु-पक्षियों के लिए भी पानी और छाया की व्यवस्था की गई है। दिल्ली सरकार ने दफ्तरों के समय में बदलाव किया है, ताकि कर्मचारियों को लू से बचाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि आपात स्थिति में तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, शहरों में ताप लहरों का असर महिलाओं पर अधिक पड़ता है, खासकर वे महिलाएँ जो घरों में ठंडक के साधन के बिना रहती हैं या देखभाल की जिम्मेदारी निभा रही हैं। ‘यूनाइटेड नेशन्स हिंदी’ के अनुसार, देखभाल करने वाली महिलाएँ, बुजुर्ग महिलाएँ और जिनके पास सुरक्षित परिवहन की सुविधा नहीं है, वे हीट वेव के दौरान ज्यादा जोखिम में रहती हैं। ऐसे में सरकार ने संवेदनशील वर्गों के लिए हीट वेव एक्शन योजनाएँ अपनाने की बात कही है।
शहर में छायादार पार्क, कूलिंग कॉरिडोर और हरित क्षेत्रों के विस्तार की जरूरत पर भी बल दिया गया है। ऊर्जा-दक्ष और किफायती आवास के लिए निवेश की बात हुई है, जिससे ठंडक सभी के लिए उपलब्ध हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी से बचाव अब केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि लैंगिक सशक्तिकरण का भी मुद्दा बन चुका है।
दिल्ली सरकार और प्रशासन के इन कदमों से उम्मीद की जा रही है कि नागरिकों को हीट वेव के इस दौर में राहत मिलेगी और गंभीर स्थिति से निपटने में आसानी होगी।
