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Breaking News:उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में शिव-पार्वती विवाह की अनोखी परंपरा चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां एक अनूठी रस्म के तहत महादेव और माता पार्वती की शादी में दहेज के रूप में टीवी, फ्रिज, बाइक, एसी जैसे आधुनिक सामान दान किए जाते हैं। यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है और स्थानीय समाज में खास आकर्षण का केंद्र है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस आयोजन में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतीकात्मक शादी कराई जाती है। इस अवसर पर दहेज में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं और वाहन भी शामिल किए जाते हैं। आयोजकों का कहना है कि यह परंपरा न केवल धार्मिक श्रद्धा से जुड़ी है, बल्कि समाज में एक अलग संदेश भी देती है।

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इस विवाह समारोह के दौरान स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। आयोजन की खास बात यह है कि विवाह की सभी रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई जाती हैं, लेकिन दहेज में दी जाने वाली वस्तुएं पूरी तरह आधुनिक होती हैं। टीवी, फ्रिज, बाइक और एसी जैसी चीजें दान स्वरूप भगवान शिव को समर्पित की जाती हैं।

समारोह में भाग लेने वाले एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, ‘‘यह परंपरा कई सालों से चल रही है और हर वर्ष इसमें नए-नए सामान जोड़े जाते हैं।’’ आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह परंपरा क्षेत्र में एकता और सामाजिक समरसता का उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

समारोह के दौरान स्थानीय लोग भगवान शिव और माता पार्वती की झांकी सजाते हैं। बाद में शादी की सभी रस्में पूरी की जाती हैं। इस दौरान दूल्हा बने भगवान शिव को प्रतीकात्मक रूप से दहेज में दिए गए सामान भेंट किए जाते हैं। आयोजन के अंत में सामूहिक भोज भी कराया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होते हैं।

इस अनूठी रस्म की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हो रही है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन गई है। कई लोग इसे आधुनिकता और परंपरा का संगम मानते हैं।

आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में सहयोग और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करता है। बदायूं जिले में महादेव और माता पार्वती की इस अनूठी शादी को देखने के लिए हर साल दूर-दूर से लोग आते हैं।

समारोह के आयोजक मानते हैं कि इस परंपरा से क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहता है और लोग सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। आयोजकों ने बताया कि आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा जारी रहेगी और इसमें समय-समय पर नयापन भी लाया जाएगा।

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